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अजय सिंह, दैनिक जागरण, फैजाबाद


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अयोध्‍या में बोले कागा हो रामनवमी के दिनवा

Posted On: 30 Mar, 2012  
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76 Comments

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा:

के द्वारा: ajaydubeydeoria ajaydubeydeoria

के द्वारा:

पंचकर्म चिकित्सा केंद्र का कार्यक्रम -- 23 अप्रैल 2011 आर्य समाज , मोती नगर Block 17, नई दिल्ली 110015 कीऔर से "श्री संतुलन पंचकर्म चिकित्सा केंद्र" का विधिवत उदघाटन 23 अप्रैल 2011 सायं 4 .15 बजे प्रसिद्ध समाजसेवी महाशय धर्मपाल (प्रधान आर्य केंद्रीय सभा दिल्ली राज्य ) करेंगे I रोगियों को रोगमुक्त करने के लिए वरिष्ठ वैद डाo हेमंत मोदी की देख रेख मैं पंचकर्म पद्धति से उपचार किया जाता है I 125 वें दिवस के उपलक्ष्य पर उद्योग मंत्री दिल्ली सरकार डा० रमाकांत गोस्वामी, विधायक श्री सुभाष सचदेवा, निगम पार्षद श्री वेद प्रकाश गुप्ता व अनेक गणमान्य प्रतिष्ठित महानुभाव कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे I श्री विनय आर्य जी , राजीव आर्य जी , धर्मपाल आर्य जी समस्त दिल्ली के आर्यजन का प्रतिनिधित्व करेंगे I इस अवसर पर आपका स्वागत है I संयोजक सुरेन्द्र कोछड़ Search ayurngo on google

के द्वारा:

अजय जी आप का सन्देश क्या है इस लेख में कि पुरानी प्रथा समाप्त हो या और कुछ आप का अपना विचार उस की कुछ वकालत समझ में नहीं आई, क्या और कोई उपाय नहीं है कि इन्हें वहां से भगाया जाये, जिस पेड़ को वे बहुत पसंद करें उसे हटाया जाये , मारा भले न जाये किस किस को हम अपना पूर्वज मानते फिरेंगे बन्दर को चमगादड़ को जब ये कम थे तो कोई हानि नहीं थी -विशेषज्ञ से पूछना होगा जैसे कि आज सब नील गाय से त्रस्त हैं साडी फसल खा रौंद कर किसानो को ठिकाने लगा दे रहे हैं ये कहीं कही हमने देखा झुण्ड पर झुण्ड भागने जाओ तो आप को भी खदेड़ दें -मारना मना ठीक है तो सर्कार पकड़ कर ले जाये जंगल बनाये उसमे रखे शुक्ल भ्रमर ५

के द्वारा:

अजय जी नमस्कार मेरे कुछ प्रश्न है , Foreign Medical Graduates se related, आशा है आप इन्हें उठाने में मेरी सहायता करेगे Everything is not fine in MCI and National board of Examination who conduct examination for Foreign Medical Graduates. If you think everything is trasparant there, and they are very honest and the such screening examination is REALLY SO NECESSARY for Foreign Medical Graduates, Why students are not enabled to cross check their answer sheets (ORS) for any marking error with answer key put by NBE? Why MCI or NBI not supposed to give any information regarding examination or examination results to the students? Why there is no provision for reevaluation? If you think the foreign students are REALLY weaker than Indian Medical Graduates or the lavel of study is poorer in other countries than India, why you allow students to go other countries? If you think Indian Medical Graduates are wiser than Forein Graduates, then why you do not conduct such an examination for them also? Why you just destroying the carriers of thousands of students? Everytime thousand of students can not qualify examination just by 10-20 marks, why you don’t revise your criteria? In India passing percentage is 33% for all the examinations, if it is only screening examination why 50% marks are required in place of 33%? Do this examinations pattern or result is affected by the community of private colleges in India?

के द्वारा: keshavpandey keshavpandey

देश की दुर्दशा के लिए सिर्फ और सिर्फ हमारी युवा पीढ़ी ही जिम्मेदार है । मुझे तो लगता है देश की माताओं ने अब नेता जी सुभाष ,भगत ,चंद्रशेकर आज़ाद ,बिस्मिल जैसे देशभक्तों को जन्म देना छोड़ दिया है। आज की युवा पीढ़ी केवल पढ़ लिखकर ऐश और आराम के जीवन को ही प्राथमिकता देती हैं ऑर्कुट और फकेबुक जैसी चीजों का सिर्फ चैटिंग के लिए ही इस्तेमाल करना जानती हैं ,बचपन में देश के लिए क्या क्या कर गुजरने की बातें सोचते हैं जब सही समय आता है कुछ करने का तो दौलत की रेश में लग कर देश को चोरों और भ्रष्ट लोगों के राज करने के लिए छोड़ देते हैं। उन बेचारे गरीबों को गालियां बकते हैं कि जनता ही ऐसे लोगों को वोट क्यूँ देती है,मैं पूछता हूँ जब कोई देशभक्त युवा देश के लिए सब कुछ त्याग कर बिना निर्भय के आगे नहीं आएगा तब तक जनता कहाँ जाये । जब हम जैसे पढे लिखे आगे आकार इनके खिलाफ क्रांति का बिगुल नहीं बजाएँगे कोई गरीब इन दुराचारियों से कैसे लड़ने की हिम्मत करेगा। ये शर्म की बात है जिस देश में लगभग 50% जनता युवाओं की है उस देश मैं अनपढ़ ,चोर ,गँवार ,देशद्रोही ही देश पे राज करते हैं । जिस दिन इन पढे लिखे युवाओं के बीच से कोई सुभाष उठ खड़ा होगा देश की दिशा स्वयं तय हो जाएगी...........जय हिन्द जय भारत

के द्वारा: sahusk sahusk

के द्वारा:

के द्वारा: अंशुमाली रस्तोगी अंशुमाली रस्तोगी

me batla sakta hu | kaise rukesakta aatankbad iske liye aapko mujhse mob. par bat kare 09300858200 Respected sir, namaskar who are really interested to remove corruption I’ve excellent idea, from which 100% terrorism, corruption like bad happenings will be removed. Also the World Bank loan, will be removed. This idea will not require any detective cameras (CCTVs), will not made hard and strict rules, also did not the public support. By not doing such things, the following advantage will be there:- 1. It will remove terrorism, corruption, black money, stealing of tax, etc. the population will live the peaceful life.it means “om shanti-om shanti ” 2. It will automatically return us the black money collected in other countries . 3. In this idea, 1/- Re. equal to above 100$ . 4. It will make us at the top & at the top means top from China and America & 100 times top. It means “India is sone ki chidhiya” 5. World companies could not come in the India but the Indian companies will do the business in the world. 6. As more surprising that the petroleum gas cylinder will costs for Rs.50/- & petrol for pay only 5/- per liter. 7.At present Income tax @ 30%, will be reduced to 0.5% (1/2%). & other revenue from taxes will be removed. Really this idea is more surprising & excellent. This idea is possible by the God’s blessing. I’m trying to tell my idea from before 5 years to make possible. I want your important & valuable time to get to me When u got satisfied with this idea,pl. contact to me on phone or mobile. I’ve given this idea a name i.e., “Brij-economics”. This idea have the “currency mode to shift to banking (ATM).” I’ve made this project fully. In this the poor people & the uneducated person will not have to learn any password & this idea is fully errorless. I’m trusting you all & I think that after reading this letter u will definitely contact me & give me the support. Thanking you. Yours truly, Madan Gopal Brijpuria. Kareli(Narsinghpur) M.P. Date:-30/12/2010 My contact numbers are:- 09300858200 07793-270468 Madanbrijpuria59@gmail.com

के द्वारा:

अजय जी, सादर अभिवादन अयोध्या के संदर्भ में आपने जो भी कुछ लिखा है, उसके लिए आप साधुवाद के पात्र है। मैं भी फैजाबादी हूं, और अयोध्या से मेरा बहुत ही नजदीकी का रिश्ता रहा है। जो भी कुछ लिखा है, वह यथार्थ से परिपूर्ण है। यह सपना साकार हो, यही मेरी मंगल कामना है। अपरोक्ष रूप से मैं फैजाबाद में नाका मुजफ्फरा का निवासी हूं। इन दिनों मैं पंजाब में दैनिक जागरण कपूरथला उपकायार्लय का प्रभारी हूं। आपको पढ़कर मुझे अपनी मिट्टी की याद आ रही है। मन बैजेन हो उठा है, अयोध्या का 1990 से 1992 का दौर देख चुका हूं। राजनीति के दुश्चक्र में अयोध्या का जो बुरा हाल हो रहा है, उस पर अब एक सार्थक चिंतन मनन और जन जागृति की जरूरत है। इस चिंतन को अगर एक बड़ा कैनवास आप मुहैया करवा सके तो अयोध्या वास्तव में पयर्टन के मान चित्र पर अपना स्थान बना सकेगा। इस मुहिम में मेरा जो भी सहयोग आप चाहते हो उसे फोन के माध्यम से व्यक्त करना। यहां पर बहुत से धर्मावलंबी लोग है, जो अयोध्या के लिए बहुत कुछ करने को तैयार है। मेरा मोबाइल नंबर 09888365050 है।

के द्वारा:

मान्यवर वास्तव में शोचनीय स्तिथि और वैसे भी मेरी जानकारी के अनुसार सभी जगह एक दिन पूर्व बच्चों को छोटे पकेट बाँट कर कर्तव्य की इतिश्री मान ली गयी .इस सन्दर्भ में मैंने पहले भी लिखा था "अवकाश नहीं काम"महापुरुषों की जयंती पर थोक में अवकाश बढ़ रहे हैं.क्या यही तरीका हैं महापुरुषों को स्मरण करने का ? पब्लिक स्कूल्स में तो अधिकाँश स्थानों पर छुट्टी कर दी जाती है. एक उदाहरण छोटा सा इसी सन्दर्भ में ; मेरा बेटा M.B.A. प्रथम वर्ष का विद्यार्थी था.पन्द्रहअगस्त का अवसर आया ,कालेज में अवकाश घोषित कर दिया गया.बेटे ने अपने संस्थान के प्रशासनिक अधिकारीयों से मिलकर इस बात का विरोध किया अंतत अधिकारीयों ने मनाने की अनुमति दी.साथियों के साथ मिलकर उसने पूरी व्यवस्था की,उसके बाद निदेशक महोदय ने ध्वजारोहण किया.अतः अवकाश घोषित न कर विद्यालयों में राष्ट्रीय पर्व व जयंती मनाई जाए ऐसी व्यवस्था हर स्तर पर सुनिश्चित होनी चाहिय. धन्यवाद

के द्वारा: nishamittal nishamittal

आप लोग की बात से मै सहमत हूँ वहां पैर सेना ही एक विकल्प है पैर येः कब तक chalega इसक कोई अस्थाई smadhan nikalna पड़ेगा वहां पर सेना तयनात करने से सांति आसथी है वहां पर सांति लानी है तो वह क जनता में वेस्वास पैदा करे बेरोजगार को रोजगार दें कश्मीर क लोग देश भर में कहीं जाये तो काश मेरे क नाम पर बेलावाजः परेसान न करे वहां पर स्कूल कॉलेज की कमी को पुरा करे सेना को तयनात करेंगे कुछ दिन शांति hogi उसक बाद फिर वही चलो हो जायेगा कोई फरजी enconuter हो जायेगा फिर धरना पर्दर्शन सुरु हो जायेगा वह क लोगो सब बड़ी चीज़ है विस्वास पैदा करना की हम आप की सुरुक्षा क लिए सेना तयनात किया है / जब तक दिल नहीं जीता जायेगा कुछ नहीं होगा वैसे ही जलता रहेगा पडोसी हमरे गुश पित करते रहेंगे / जय हिंद

के द्वारा:

के द्वारा:

ज़िन्दगी meie भगवन nesuch  कहा है जैसी करनी वैसी भरनी जैस बोयेगेन्य वैसा फल मलेगा एक इन्स्सन asia भी है उसके घर मेइएकुइतना चाद्द है उसे कुछ हो जाये सदसद केर मारे इतना चढ़ चूका है मौत भी उसके नजदीक न आती कोई उससे पूछे जब कोई है नहीं तुब पैसे का क्या करोग्री तुब कोई जवाब नहीं च साल पह्हले एक खुशाली वाला घर था पे न जाने भगवन को क्या मंज़ूर था उसके घर कई मौतू को उस बुराग नने देखा पैर दिल न दहेला जबकि जवान मौतें थी भगवन पैर कभी विश्वास नहीं थ उसकी करनी का वोह फल देख रहा था पैर पिछले कर्मों इस जनम के कर्मो को भी नहीं मानता और और भी दुखो से परेसान है पैर पैसे का मोह उसपर मौत सामने हो तब भी मौत से न डर कर पैसे को गल्ये लग्लेगा यह किस बाप का धरम है समझ नहीं aata

के द्वारा:

दीपक जी आप सौभाग्‍यशाली रहे कि आपके पिता ने गोद में खिलाया। साइकि पर बैठाकर सैर कराया लेकिन कई ऐसे दुर्भाग्‍यशाली लोग भी होते हैं जिन्‍हें प्‍यार की बजाय तिरस्‍कार ही मिलता है। ऐसे में वे अपने दिल की बात पिता से कहने से डरते हैं। उनमें कुण्‍ठा का भाव पनपता है। कुछ तो अच्‍छी संगत पाकर सही राह पर चल पड़ते हैं जबकि उनमें से ज्‍यादातर लोग बेकार हो जाते हैं। वे या तो जरायम का रास्‍ता अपना लेते हैं अथवा मेहनत-मजदूरी कर दो वक्‍त की रोटी का जुगाड़ करने में ही समूचा जीवन गंवा देते हैं। अब जबकि शिक्षा का स्‍तर बढ़ रहा है लोगों को बच्‍चों को भविष्‍य की चिंता सताने लगी है। इस कारण वे गांवों से निककर बच्‍चों की पढ़ाई के लिए कूच कर देते हैं। अच्‍दी प्रतिक्रिया के लिए बहुत आभार

के द्वारा:

मैं भी ऐसे कुछ बेटों को जानता हूँ जिनको उनके माँ - बाप ने असीमित प्यार दिया हर तरह से सहयोग दिया लेकिन उन्होंने उनका ऐसा तिरस्कार किया की बाप के मरते समय भी पहले तू पहले तू करते रहे. माँ आज अपनी बेटियों के साथ रह रही है. लेकिन ये एकमात्र नहीं है जिनको मैंने देखा है. ये तो देहात के हैं मैंने शहर में भी एक संपन्न बेटे बहू को माँ बाप से शत्रुता निभाते देखा है. मेरा मन्ना हैं की कोई भी माँ बाप अपने बच्चों की भलाई ही सोचता है हाँ उनका तरीका अलहिदा हो सकता है. मेरे पापा ने बताया की उन्होंने शर्म की वजह से मुझे हमेशा एकांत में ही गोद में उठाया, उनकी उस समय की वर्जनाये रही होगीं. परन्तु मुझे आज भी उनकी गोद याद है, उनकी साइकिल के डंडे पर बैठकर की गई शहर की सैर याद हैं, उन्हें हो या न हो. क्या इनका लम्हों का कोई मोल है. फिर बच्चे क्यों हिसाब किताब की टोकरी खोल कर बैठ जाते हैं उनके सामने जब उनकी आँखों में इतनी लौ नहीं बची होती कि उन्हें हिसाब के पन्ने भी दिखाई दे, क्या ऐसी संतानों को किसी माँ बाप ने कभी कोसा है? नहीं कभी नहीं. आप उनके बच्चों को कुछ कह कर देखिये. मैं खुसनसीब हूँ कि शहर में रहता हूँ और मेरे माँ बाप मुझे मेरे बच्चों को प्यार करते देख, गोद में उठाते देख खुश होते हैं. जब इतना सारा प्यार आस पास हो तो बच्चे भी प्यार का फल देगें. अभी तो येही उम्मीदें हैं, कल का कल देखेंगे. बधाई. दीपक कुमार श्रीवास्तव

के द्वारा: deepaksrivastava deepaksrivastava

इस देश में जनता करे गांधीगिरी,नेता-अधिकारी करें घोटाला और गबन गिरी स्वतंत्र भारत का इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या होसकता है,के आजादी ६३ बर्ष बाद भी हम निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्ता कायम नहीं कर सके.हर शाख पे उल्लू बैठा है,अंजामें गुलिस्ताँ अब और क्या होगा.राम जतन ग्राम प्रधान जी तो कुछ भी नहीं,गुरुओं के गुरु,चोरों पे मोर,दिग्गज और धुरंधर घोतालाबाज़,गबन करने के पारंगत पुरोधा इस देश की धरती पर सदैव जन्म लेते रहे है,और राष्ट्र की आत्मा और मर्यादा का बार बार चीरहरण करने का खिताब पाने के ये पूर्णतया पात्र हैं,इनके नाम ये खिताब अवश्य ही गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होना चाहिए ,आइये ऐसे ही कफ़न चोरों के वंशजों से आपका परिचय करते हैं-----नेक्स्ट continued

के द्वारा:

के द्वारा: SUNEEL PATHAK SUNEEL PATHAK

अजय जी अभिवादन, पहले तो इस देश की शिक्षा पद्दति को एक समान करने की जरुरत है. दूसरा ये की शिक्षा में 'नैतिक शिक्षा' अनिवार्य विषय के रूप में कर दिया जाये. प्राइमरी शिक्षा से लेकर विशेषज्ञ शिक्षा तक 'नैतिक शिक्षा' पढना अनिवार्य कर दिया जाये. एक व्यक्ति डाक्टरी या वकालत या कुछ और मूल पढाई के साथ नैतिक शिक्षा भी पढ़ेगा तो आजीवन होश में रहेगा. आप कलेक्टर है, परिवार सहित मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा या चर्च दर्शन के लिए गए, वहां १५ लोगों की पहले से लाइन लगी है, आप क्या करेंगे ? कुछ लोग तो आपको देखकर डर जायेंगे, कुछ आपको अपना स्थान अर्पित करने की कोशिश करेंगे, कुछ चमचागिरी के लिए आपके आगे पीछे घूमेंगे, दूसरी और वी आई पी कोटे का रास्ता भी है, ऐसे में स्वस्थ नीति क्या कहती है? यही न की आप १६वे नंबर पर खड़े हो जाये वह भी अन्यों का शुक्रिया करके. लेकिन यह कब संभव है ? जब आपमें नैतिक मूल्य होगा, नैतिक दृष्टिकोण होगा. अन्यथा वही करेंगे जो आज कल हो रहा है- वी आई पी कोटे का इस्तेमाल करते हुए चमचों के साथ सबसे पहले दर्शन करके लोगों के सामने से भाव खाते हुए सायरन से साथ निकल जायेंगे. धन्यवाद.

के द्वारा:

वैसे तो देश के सभी नेता साफ़ छवि दिखाना चाहते है, लेकिन सभी दलदल में फसे है. वह चाहकर भी इस दलदल से बहार नहीं निकल सकते. इसमें बसपा अपनी छवि सुधारना चाहती है तो कोई नै बात नहीं. सभी पार्टिया यह कहकर ही अपना अस्तित्व बनाना चाहती है. हर बार इलेक्शन होता है पैर रिजल्ट कुछ भी नहीं. यह तो राजनैतिक पार्टियों का कोई नया फंदा है जो हमार्री और आपकी समझ से बहार है. हम सभी तो लचर है जो हर पञ्च साल में किसी एक बड़े चोर कोई गद्दी पर बैठा देते है जिससे वह हमें अछि तरह लुट ले. हम करे भी क्या हमारा सविधान हमें कोई पॉवर नहीं देता. हम लचर है. यह तो चोर है .. कहा भी जाता है चोर चोर मौसेरे भाई. बचपन से आज तक हमने बड़े नारे सुने है. रिजल्ट कुछ भी नहीं.. कुछ दिनों पहले की बात है... एक पार्टी ने महंगाई के मुद्दे को लेकर विधानसभा में एक मत रखा जो मात खा गया. क्यों नहीं ज्यादा पैसे कमाने का हक हर पार्टी को है. इ प ल क्रिकेट संस्था में सभी चोर लोग जो सम्मिलित थे. दोष हम सभी का है .... लोगो पैर राज तो अनपढ़ और गावर लोग ही करते है. आईएस बनकर भी कुछ नहीं होता नेता लोगो के जुटे ही चाटने पड़ते है. देश के नेवसपपेर और टीवी चैनल सभी चोर है. इनके लिए मोह माया ही सभी कुछ है.... इसमें अगर बसपा ने चोर लोगो को हटाने का फैसला अगर लिया है तो वहा अधुरा है... इसका मतलब साफ़ है जो कोई बड़ा चोर हो वह सामने आये और बाकी लोगो का साथ दे..... शायद हम सभी डरपोक है अपने सविंधान की भांति जो की एक नपुंसक की भांति हमें अधिकार तो देता है लेकिन पॉवर नहीं.... आज कोई भी व्यक्ति सुरक्धित नहीं चाहे लड़का हो लड़की हो. जवान हो बुध हो. नेता हो या अभीनेता हो.....

के द्वारा:

जो आंबेडकर के और दलितों के नाम पर राजनीति कर रहे हैं उनकी सरकार के रहते तो वे काफी बदलाव दलितों के जीवन मैं ला सकते थे जबकि उन्होंने दलितों को सिर्फ झुनझुना ही पकडाया है,सब अपना उल्लू सीधा करने मैं लगे हैं ,इनसे कई गुना बेहतर तो वो हैं जो दलितों की पीड़ा महसूस करें और उनके उत्थान के लिए सार्थक प्रयास करें चाहे वो दलित वर्ग से नहीं भी आते हों,भूखे को रोटी,अशिक्षित को शिक्षा,और बेरोजगार को रोजगार की जरूरत है न कि मूर्तियों और पार्कों की, नोटों की माला पहनना तब शोभा देता है जब प्रद्रेश का हर आदमी खासकर दलित इतना सम्रद्ध हो जाए कि वो नोटों कि माला पहन सकता हो,देश में महात्मा गाँधी को छोड़कर सबकी मूर्तियों को लगाने पर पाबन्दी लगनी चाहिए,कुछ ऐसा काम करो कि मूर्तियाँ शोभा दें,

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के द्वारा: मुकेश पाण्‍डेय मुकेश पाण्‍डेय

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